अंडमान निकोबार

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बंगाल की खाड़ी में स्थिर निर्मल और शांत अंडमान निकोबार द्वीप समूह अब एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन चुका है | मानसून में इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है | मनोरम सागर तट, पुराणी यादों से जुड़े खंडहरों और दुर्लभ विविधताओ के कारण यह स्थल भागदौड़ भरी जिन्दगी में एकांत की सौगात बनकर उभरा है…..

भारत के अंतिम छोर पर मुख्य प्रायद्वीप से दूर जब हवाई जहाज बंगाल की खाड़ी के पोर्ट ब्लेयर नामक शहर में उतरता है, तो भले ही स्वागत के लिए रेड कारपेट न बिछा हो पर चारों तरफ फैली नीली व हिलोरें लेती लहरें देती हैं एक सुहाना एहसास | ऐसा प्रतीत होता है कि मानो यहाँ आपके स्वागत में नीला कालीन बिछ गया हो | ऐसा आभास होता है की जैसे ये लहरें खुद आपको अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की सैर कराने के लिए उत्सुक हो रही हो | कुछ एस अंदाज में आकर्षित करता यह द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी तथा अंडमान समुंद्र के शीशे के तरह पानी के लिए दुनिया भर में मशहूर है | अगर आप बीचप्रेमी हैं तो अंडमान आपके लिए स्वर्ग से कम नहीं है | यह द्वीप अपने तटीये इलाकों और लहरों के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी मशहूर है | इस द्वीप की सुंदरता एवं सुरक्षित भौगोलिक स्थान के कारण जापानी, ब्रिटिश, डेनिश तथा फ्रेंच उपनिवेशवादियो ने एक-एक कर एन द्वीपों पर कब्ज़ा किया था | वर्ष 1956 में यह द्वीपसमूह भारत का केंद्रशसित प्रदेश घोषित किया गया और तब से भारतीय पर्यटकों की जैसे विस्मयकारी नजरों की सौगात मिल गयी है |

रास आइलैंड

द्वीप में बचे हुए खंडहरों में लगी लताएं ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे इन खंडहरों को जकडकर उनको संजोए रखने का काम कर रही हों | यह है रास आईलैंड, जो ब्रिटिश शासनकाल में राजधानी हुआ करता था | यहाँ के अफसरों को अपने देश की विलासिता की कमी न महसूस हो इसलिए यहाँ पर ‘क्लब हाउस’, ‘पार्टी होल’ और ‘इंफिनिटी पूल’ जैसी सुविधाओं का प्रबंध किया गया था | एक ज़माने में यह द्वीप विलासिता का बिजोड़ नमूना हुआ करता था | यहां की हर एक इमारत को राजस्थान से मंगवाए गए संगमरमर, इटली की ‘टाइल्स’ और कीमती पत्थरों से सजाया गया था | इस द्वीप को अभी ‘वाइल्ड लाइफ’ संरक्षण के तहत सुरक्षित रखा गया है | यहाँ आपको हिरन, मोर, खरगोश, जंगली गाय तथा अनगिनत पंछी अपने साथ इस द्वीप की सैर कराते नजर आएंगे | शाम के चार बजे इस द्वीप पर ‘लाइट एंड साउंड शो’ का आयोजन भी होता है | इसके लिए पहले से बुकिंग कराना अनिवार्य है |

 

आदर्श भारत का नमूना

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह एक ऐसी जगह है, जहां पुरे भारत के लोग आकर बसे हुए हैं | एक वक़्त था जब मुख्य भारत से यह दूर प्रतीत होता था | तब कोई इन द्वीपो पर बसना नहीं चाहता था | पिछले कुछ सालों में बढ़ते पर्यटन उधोग के कारण कमाई की चाह में मुख्यद्वीप से आकर लोग यहां बस रहे हैं | कहते हैं कि समुंद्र के बीच स्थिर होने के कारण नियमित रूप से आने वाले तूफानों-आपदाओं ने यहां के निवासियों को संवेदनशील एवं परोपकारी बना दिया है | बंगाली, पंजाबी, तमिल, बिहारी सब यहाँ मिल-जुलकर व्यवसाय चलाने में एक-दूसरे की मदद करते हैं | अंडमान के स्थानीय लोग शिष्ट और ईमानदार माने जाते हैं | बाजार भी जाएँ तो यहाँ आपको उचित दामों में चीज़े मिलेंगी | बेहद शांत और नीरव यह द्वीप समूह वास्तव में आदर्श भारत का नमूना कहा जाता है |

एशिया का सुंदरतम तट हैवलोक आईलैंड

हवाओ से बातें करते लहराते हुए नारियल के पेड़ जब पूरे किनारे पर सजे हो और बच्चे भी आनंद लेते हुए झुला झूल रहे हो, तब समुंद्र का भी मन करता है की रेत को चूमकर खूबसूरत तट की रचना करे | कुछ ऐसी ही सुंदरता नजर आती है हैवलोक आइलैंड स्थिर ‘राधा नगर बीच’ पर | इस तट के आसपास हरियाली, सुनहरी रेत, साफ पानी और एक तरफ पथरीली चटटानो को ध्यान में रखते हुए ही इसे एशिया के सबसे सुंदर बीच का ख़िताब दिया गया है | नारियल के पेड़ो की छांव में बैठकर आप सुबह सूर्य की कोमल किरणों और समुंद्र की लहरों की अठखेलियां देख सकते हैं |

 निकोबारी बम्बू हट्स

बम्बू यानि बांस की पत्तियों से बनी दीवारें, लकड़ियों से बनी छत और आरामदायक बरामदे | यहाँ से आप दूर तक फैले समंदर का नजारा देख सकते हैं | यहाँ टीवी, फ्रिजसहित तमाम आधुनिक उपकरण और सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं | ये आधुनिकता एवं पारंपरिक शैलियों का अनोखा मिश्रण हैं | यह रहने का सुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता | हैवलोक, नील, पैरट आइलैंड तथा दुसरे कई मशहूर द्वीपों पर मौजूद कुटिया में रहकर आपकी यात्रा और अविस्मरणीय हो सकती है |

तैरने वाले हाथी राजन की यादें

हमारा देश हाथियों की अनगिनत प्रजातियों के लिए मशहूर है, पर तैरने वाला हाथी सिर्फ अंडमान के हैवलोक द्वीप पर ही पाया जाता था | हालांकि अब यह अतीत की बात हो चुकी है | यहां राजन नामक हाथी इस प्रजाति का आखिरी हाथी था, जो पर्यटकों के साथ तैरने का शौकीन था | राजन सारे ‘स्कूबा डाइवर्स’ तथा वन्यजीव प्रेमियों का प्रिय था | उसे वर्ष 1970 में कर्नाटक से अंडमान लाया गया था | बाद में ‘बेरफुट रिसोर्ट’ ने उसे गोद ले लिया था | सिर्फ भारत में ही नहीं , बल्कि हॉलीवुड में बनी फिल्म ‘द फ़ॉल’ के बाद राजन पूरी दुनिया में मशहूर हो गया था | 2014 में राजन का निधन के साथ भारत का एकमात्र तैराकी हाथी अपने प्रशंसको को अलविदा कह गया | आज भी हैवलोक जाने वाला हर पर्यटक ‘बेरफूट रेसॉर्ट’ में उसकी यादों के किस्से सुनने जरुर जाता है |

सेल्युलर जेल: कभी था ‘कालापानी’

अंग्रेजो ने इस इमारत की रचना एक साईकिल के पहिये के आकार में कुछ इस तरह की थी कि एक कैदी को दुसरे कैदी के चेहरा कभी दिख न पाए| हर एक कमरे में सिर्फ एक खिड़की बनाई गयी थी, ताकि सूर्य की सिर्फ थोड़ी-सी रोशनी अंदर आ पाए | सेल्युलर जेल आजादी के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओ की गाथा सुनाता है | भारतीयों के साथ किये गये अत्याचारों के किस्से सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे| आज यहाँ ‘लाइट एंड साउंड शो’ के दौरान जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के नारियल से तेल न निकालने पर बसरने वाले कोड़े तथा ‘भारत माता की जय’ बोलने पर दिए जाने वाले कठोर दंड का नाटकीय प्रदर्शन होता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हीन | आजादी से पहले तक यह जेल ‘कालापानी’ के नाम से कुख्यात थी | अब इस इमारत को एक अस्पताल में परिवर्तित कर दिया गया है, जो आज अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह का सबसे बड़ा अस्पताल है यहाँ की कुल सात इमारतों में से अब सिर्फ तीन ही बची हुई हैं|

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कला पत्थर का दिलकश नजारा

राधानगर बीच को भले ही सबसे सुंदर बीच का खिताब दिया गया हो, पर आम यात्रियों की नजर से दूर हैवलोक द्वीप पर जब आप कला पत्थर बीच रोड से गुजरेंगे तो आपके साथ उछलती-कूदती फिरोजी लहरें भी सफर करती नजर आएंगी | यहाँ की अनछुई रेत आपको ऐसा प्रतीत करवाएंगी जेसे आप किसी ‘प्राइवेट बीच रेसॉर्ट’ पर बैठे हों | ज्यादा पर्यटक न होने से यह बीच एकदम साफ-सुथरा और शांत भी रहता है | भीड़-भाड़ से दूर एकांत में कुछ रूमानी लम्हों के लिए यह बीच एकदम परफेक्ट है |

 

समुंद्री व्यंजनों के विविध जायके

अगर आप मछलियों, समुंद्री जीवो से बने स्वादिष्ट व्यंजन खाने के शौकीन हैं तो अंडमान व् निकोबार द्वीपसमूह आपके लिए एक बेहतरीन जगह है | यहां का हर एक द्वीप ताजी मछलियों के लिए जाना जाता जय | कई रेस्टोरेंट्स में आपको खारे पानी में रखे गए जीते-जागते जीवों को खुद पसंद करने का मौका भी दिया जाता है, फिर आपके पसंदीदा सी-फ़ूड को ताजा काटकर आपके स्वादनुसार तल के या ग्रेवी के साथ परोसा जाता है | नॉथ-बे द्वीप पर अपने ‘फिश फ्राई’ के लिए मशहूर एक स्टॉल में बंगाली बावर्ची आपको स्वादिष्ट फिश फ्राई परोसने के अलावा करारा फिश बनाना भी सीखता है | हैवलोक स्थिर ‘अंजू कोको रेस्टो अपने वेज तथा नॉन-वेज खाने के लिय लोकप्रिय है इस रेस्टोरेंट के मालिक आपको अपने स्वाद और पसंद के अनुसार केक, फिश, केकड़े तथा लोबस्टर भी आर्डर देने पर बनाकर देते हैं | राजधानी पोर्ट ब्लेयर में आनंदों रेस्टोरेंट तथा लाइट हौसे रेस्टोरेंट अपने ऐसे ही स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए मशहूर हैं |

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एन्थ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम

सेंटीलेस, ओंगे, द ग्रेट अंडमानिस, कोरा, शोम्पेन, जारवा और ऐसी कई जनजातियों-आदिवासियों के बारे में चौकाने वाली जानकारियां देता है पोर्ट ब्लेयर स्थिर मानवविज्ञान संग्रहालय | इस संग्रहालय में पुराने बर्तन, नव, घर, औजार तथा त्योहारों को खूबसूरती से प्रदशित किया गया है| जारवा को जिवंशैले के बारे में यहाँ और करीब से जानने के अलावा उनके बनाए उत्पादों को खरीद भी सकते हैं |

पोर्ट ब्लयेर का अबरदीन बाजार

पोर्ट ब्लेयर में बसे इस बाजार में ऊंची-ऊंची इमारतें या आधुनिक मोल संस्कृति तो नहीं आई है, पर यह बाजार शहर की शान है | यहाँ आपको जरूरत की हर चीज़ मिल जाएगी | शानदार रेस्टोरेंट्स तथा भव्य होटल भी मिलेंगे | यहं आकर मोतियों के गहने, स्थानीय पडुक लकड़ी के बने मेट और सीप आदि खरीदने का रोमांच अलग है |
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